Geeta Quotes in Hindi  गीता पर महापुरुषों के अनमोल वचन 

Geeta Quotes in Hindi – हमने अपने अनुवाद में गीता के सरल, खुले और प्रधान अर्थ को ले जाने का प्रयत्न किया है सही, परन्तु संस्कृत शब्दों में विशेषतः भगवान् की प्रेम युक्त, रसीली, व्यापक और प्रतिक्षण में नई दृष्टि देने  वाली वाणी में लक्षण से अनेक व्यंग्यार्थ उत्पन्न करने का जो सामर्थ्य है, उसे जरा भी न घटा-बढ़ा कर दूसरे शब्दों में ज्यों का त्यों झलका देना असंभव है.

-लोकमान्य तिलक(गीता रहस्य)

ज्ञान-भक्ति-युक्त कर्मयोग ही गीता का सार है.

-लोकमान्य तिलक(गीतारहस्य,उपंहार)

Geeta Quotes in Hindi – गीता-धर्म कैसा है ? वह सर्वतोपरि निर्भय और व्यापक है. वह सम है अर्थात् वर्ण, जाति, देश या किसी अन्य भेदों के झगड़े में नहीं पड़ता, किन्तु सब लोगों को एक ही मापतौल से सद्गति देता है. वह अन्य सब धर्मों के विषय में यथाचित सहिष्णुता दिखलाता है. वह ज्ञान, भक्ति और कार्ययुक्त है; और अधिक क्या कहें ? वह सनातन वैदिक धर्म-वृक्ष का अत्यन्त मधुर तथा अमृत-फल है.

-लोकमान्य तिलक(गीतारहस्य,उपसंहार)

समता, अनासक्ति, कर्मफल-त्याग, भगवान में आत्मसमर्पण, निष्काम कर्म, गुणातीतता और स्वधर्म-सेवा ही गीता का मूल तत्व या सारांश है.

-अरविन्द

Geeta Quotes in Hindi – गीता नीतिशास्त्र या आचार शास्त्र का ग्रंथ नहीं है अपितु आध्यात्मिक जीवन का ग्रंथ है.

-अरविन्द (गीता-प्रबन्धन)

गीता जिस कर्म का प्रतिपादन करती है, वह मानव कर्म नहीं अपितु दिव्य कर्म है.

-अरविन्द(गीता-प्रबन्धन)

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गीता पर महापुरुषों के अनमोल वचन

युद्ध को पाप तथा आक्रामकता को नैतिकता का अधः पतन समझकर पीछे हटने वालों के लिए गीता सर्वोत्तम उत्तर है.

-अरविन्द

Geeta Quotes in Hindi – एक नर, किस प्रकार नारायणत्व को प्राप्त कर सकता है, इस रहस्य को श्रीगीता ने स्पष्ट शब्दों में बता दिया है. हमारी राष्ट्रीयता की आत्मा ही यहाँ पर प्रकट हो गई है. यहाँ पर स्वजन अथवा परजनों का निर्धारण, उनके गुणों एवं वृत्तियों पर ही किया गया है ,न केवल निवास-भूमि या किसी अन्य बाह्य उपाधियों के आधार पर.

-उमाकान्त केशव आप्टे

गीता केवल ज्ञान, कर्म और भक्ति को योगमंत्र से संजीवित करके उनका समन्वय ही नहीं करती, बल्कि वह सारे जीवन को योग में परिणत करने की, जीवन के छोटे-बड़े प्रत्येक व्यापार को योग का अंगीभूत करने की , शिक्षा प्रदान करती है.

-गीता में भगवान श्री कृष्ण का परिचय और उपदेश

श्री कृष्ण ही परमेश्वर हैं. उनके उपदेश अत्यंत उदार, वास्तव में सार्वभौम एवं व्यापक हैं. जड़-चेतन समस्त प्राणियों के उत्पन्न करने वाले होने से वे सबके भीतर निवास करते हैं. उनके उपदेश बिना किसी भेदभाव के सबके लिए प्रयोजनीय हैं. भगवद्गीता पर बाहर वालों का तथा अहिन्दुओं का उतना ही अधिकार है, जितना किसी भारतीय अथवा हिन्दू कहलाने वाले का है.

डॉ. मुहम्मद हाफिज सैयद (कल्याण के ‘गीतांक में लेख)

Geeta Quotes in Hindi – मै प्रतिदिन भगवद्गीता के जल में स्नान करता हूं. वर्तमान काल की कृतियों से यह कहीं बढ़ चढ़कर है. जिस काल में यह लिखी गयी, वह सचमुच निराला ही समय रहा होगा.

-थोरो

प्राचीन युग की सभी स्मरणीय वस्तुओं में भगवद्गीता से श्रेष्ठ कोई भी वस्तु नहीं है. भगवद्गीता में इतना उत्तम और सर्वव्यापी ज्ञान है कि उसके लिखने वाले देवता को हुए अगणित वर्ष हो जाने पर भी उसके समान दूसरा एक भी ग्रन्थ अभी तक नहीं लिखा गया. गीता के साथ तुलना करने पर जगत् का आधुनिक समस्त ज्ञान मुझे तुच्छ लगता है.

-थोरो

करूणा पर अनमोल विचार

अहिंसा पर अनमोल वचन

उपकार पर अनमोल विचार

आत्मा पर अनमोल विचार

जगत् के संपूर्ण साहित्य में यदि उसे सार्वजनिक लाभ की दृष्टि से देखा जाए, भगवद्गीता के जोड़ का अन्य कोई भी काव्य नहीं है. दर्शनशास्त्र होते हुए भी वह सर्वदा पद्य की भांति नवीन और रस-पूर्ण है. इसमें मुख्यतः तार्किक शैली होने पर भी यह भक्तिग्रन्थ है.

-जे. एल. फरवयहर

इतने उच्च कोटि के विद्धानों के पश्चात् जो मैं इस आश्चर्यजनक काव्य के अनुवाद करने का साहस कर रहा हूँ, वह केवल उन विद्धानों के परिश्रम से उठाए हुए लाभ की स्मृति में है और इसका दूसरा कारण यह भी है कि भारतवर्ष के इस सर्वप्रिय काव्यमय दार्शनिक ग्रन्थ के बिना अंगेजी साहित्य निश्चय ही अपूर्ण रहेगा.

-एडविन आरनोल्ड

भगवद्गीता और उपनिषदों में सभी वस्तुओं पर ईश्वर का ऐसा पूर्ण ज्ञान मिलता है कि मुझे अनुभव होता है कि इतने विश्वास पूर्वक लिखने के पूर्व, इनके लेखकों ने शान्त स्मृति के द्वारा उग्र अन्तर्द्वन्द से भरे हुए हजारों  जीवनों को अवश्य देखा होगा, तभी तो वे ऐसी चीजें लिख सके, जिसे पढ़कर हमारी आत्मा को इतनी शान्ति और निश्चितता अनुभव होती है.

-जार्ज डब्ल्यू रसेल

अशांत मन के लिए अभीष्ट ऐसा कुछ भी नहीं है जो गीता में न आया हो.

भगिनी निवेदिता

Geeta Quotes in Hindi – ‘गीता’ पर राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के विचार

‘गीता’ की ही शरण लेकर गांधीजी ने भारत को आजाद कराया और राष्ट्रपिता की उपाधि प्राप्त की. वो प्रतिदिन गीता का अध्ययन करते थे. गीता उनके शारीरिक, मानसिक, राजनैतिक और आध्यात्मिक शक्ति का स्रोत और आधार रही. उन्होंने कहा है-

 ‘गीता’ मेरी बाइबिल या कुरान ही नहीं, उससे भी महान है, ये मेरी माता है.  मैंने बहुत पहले ही अपनी सांसारिक-मां को खो दिया था, लेकिन मेरी शाश्वत माँ ‘गीता’ ने पूरी तरह, सर्वदा के लिए उस स्थान को भरे रखा. वो कभी नहीं बदली, उन्होंने मुझे कभी भी हराने नहीं दिया. जब भी मैं हताश और निराश होता हूँ, गीता-माँ की गोद में शरण लेता हूँ.’’

महात्मा गांधी

‘‘मैं चाहता हूँ, ‘गीता’ केवल राष्ट्रीय शालाओं में ही नहीं बल्कि प्रत्येक शिक्षण संस्थाओं में पढ़ायी जाय. एक हिन्दू बालक या बालिका के लिए ‘गीता’ को न जानना शर्म की बात होनी चाहिए.’’

महात्मा गांधी

‘‘मैं स्वीकार करता हूँ कि जब मै संशयग्रस्त होता हूँ, निराशा मुझको घेर लेती है और क्षितिज में आशा की एक भी किरण नहीं दिखाई पड़ती, तब मैं भगवद्गीता की शरण लेता हूँ. एक शान्तिप्रदायक श्लोक पढ़ता हूँ और उन भारी दुःखों के बीच, मैं तुरंत मुस्कुराने लगता हूँ.

महात्मा गांधी

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