Tulsidas Quotes in Hindi तुलसीदास पर महापुरुषों के अनमोल वचन

Tulsidas Quotes in Hindi तुलसीदास पर महापुरुषों के अनमोल वचन

Tulsidas Quotes in Hindi- इस काशी रूपी आनन्द-वन में तुलसीदास चलते फिरते तुलसी-वृक्ष हैं. उनकी कविता रूपी मंजरी बहुत सुन्दर है जिस पर रामरूपी मुकट सदा मंडराता रहता है.

-मधुसूदन सरस्वती

तुलसीदास के मानस से रामचरित की जो शील-शक्ति-सौन्दर्यमयी स्वच्छ धारा निकली, उसने जीवन की प्रत्येक स्थिति के भीतर पहंचकर भगवान के स्वरूप का प्रतिबिंब झलका दिया.

-रामचन्द्र शुक्ल

Tulsidas Quotes in Hindi- गोस्वामी जी ने उत्तरापथ के समस्त हिन्दू जीवन को राममय कर दिया. गोस्वामी जी के वचनों में हृदय को स्पर्श करने की जो शक्ति है, वह अन्यत्र दुर्लभ है.

-रामचन्द्र शुक्ल

गोस्वामी जी पूरे लोकदर्शी थे. लोक-धर्म पर आघात करने वाली बातों का प्रचार उनके समय में दिखाई पड़ा, उनकी सूक्ष्म दृष्टि उन पर पूर्ण रूप में पड़ी.

-रामचन्द्र शुक्ल

गोस्वामी जी के भक्ति-क्षेत्र में शील, शक्ति और सौन्दर्य तीनों की प्रतिष्ठा होने के कारण मनुष्य की सम्पूर्ण भावात्मिका प्रकृति के परिष्कार और प्रसार के लिए मैदान पड़ा हुआ है.

-रामचन्द्र शुक्ल

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Tulsidas Quotes in Hindi- भक्ति-रस का पूर्ण परिपाक जैसा तुलसीदास जी में देखा जाता है, वैसा अन्यत्र नहीं.

-रामचन्द्र शुक्ल

गोस्वामी जी की राम-भक्ति वह दिव्य वृत्ति है जिससे जीवन में शक्ति, सरसता, प्रफुल्लता, पवित्रता, सब कुछ प्राप्त हो सकती है.

-रामचन्द्र शुक्ल

Tulsidas Quotes in Hindi तुलसीदास पर महापुरुषों के अनमोल वचन
Tulsidas Quotes in Hindi तुलसीदास पर महापुरुषों के अनमोल वचन

विश्व-साहित्य में महात्मा तुलसीदास का चाहे जो स्थान हो, पर हमारे हृदय में उनका जो स्थान है, वह किसी भी देश में किसी कवि के प्रति किसी का क्या होगा.

-चन्द्रबली पाण्डे

तुलसीदास की कोई भी रचना मनमानी नहीं हुई है और न  किसी मन्दिर में बैठकर केवल कीर्तन करने के लिए ही. 

-चन्द्रबली पाण्डे

Tulsidas Quotes in Hindi- आज की भाषा में ‘तुलसी की जय’ का अर्थ है मर्यादा की जय ! मानवता की जय !! जीव की जय !!!

-चन्द्रबली पाण्डे

तुलसीदास की ‘बानी’ जहां सुगम है, वही अगम भी, जहां मृदु है वहीं कठोर भी. फिर भी तुलसीदास ने अपने सम्बन्ध में आप ही इतना कह दिया है कि यदि उसी के प्रकाश में हम उनकी रचना के मर्म को देखने का संकल्प करें तो हमें कदाचित किसी प्रकार का भ्रम न हो.

-चन्द्रबली पाण्डे

गोस्वामी तुलसीदास की दृष्टि संग्रह की रही है-लोक संग्रह की भी, शब्द-संग्रह की भी, और तत्त्व-संग्रह की भी. उन्होंने सबको परखा, तौला और यथा स्थान सबको स्थान भी दिया.

-चन्द्रबली पाण्डे

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