virtuoso Quotes In Hindi गुणी पर सुविचार

virtuoso Quotes In Hindi गुणी पर सुविचार

virtuoso Quotes In Hindi- गुणी पुरूष का आश्रय लेने से, गुणहीन भी गुणी हो जाता है.

-चाणक्यनीति

जिस तरह का किसी में हो कमाल अच्छा हैं.

-गालिब

virtuoso Quotes In Hindi- एक शरीर में इतने गुणों के समुदाय की स्थिति कैसे हुई ?

-भवभूति

आलस्य पर अनमोल विचार  

इतिहास पर अनमोल वचन

अनुशासन पर  महान व्यक्तियों के विचार

 

कुलीनता यही है और गुणों का संग्रह भी यही है कि सदा सज्जनों से सामने विनयपूर्वक सिर झुक जाए.

-दर्पदलनम्

यदि राजा किसी अवगुण को पसंद करने लगे तो वह गुण हो जाता है. 

-शेख़ सादी

मनुष्यों को सदा गुण-प्राप्ति कर प्रत्यन करना चाहिए, कयोंकि गूणी दरिद्र भी गुणहीन धनिकों के समान नहीं अपितु उनसे बढ़कर है.

-शूद्रक

virtuoso Quotes In Hindi गुणी पर सुविचार
virtuoso Quotes In Hindi गुणी पर सुविचार

virtuoso Quotes In Hindi- गुणी जनों के लिए कुछ भी अलभ्य नहीं है.

-शूद्रक

गुणज्ञों को शत्रुओं के गुणों से भी आनन्द होता है.

-हर्ष

गुणवान लोगों के विषय में दैवी प्रवृत्तियां मर्यादाहीन, दुर्जनों की तरह क्रूर, क्षणभंगुर, दुरतिक्रमणीय तथा अरमणीय होती हैं.

-वाणभट्ट

virtuoso Quotes In Hindi- गुणी व्यक्तियों को भी अपने स्वरूप का परिचय दूसरों के द्वारा ही होता है क्योंकि आंखों को भी अपनी महिमा का दर्शन दर्पण में ही होता है.

-सुबन्धु

किसी से भी उत्पन्न गुणवान मनुष्य पूजा जाता है.

-नारायण पंडित

पुष्प की सुगंध वायु के विपरीत कभी नहीं जाती लेकिन मानव के सदगुण की महक सब ओर फैल जाती है.

-गौतम बुद्ध

गुण की परख रखने वाला गुणी को पाकर प्रसन्न हो जाता है किन्तु निर्गुण व्यक्ति गुणवान् से सन्तुष्ट नहीं होता.

-अमृतवर्धन

गुणी व्यक्ति को आता देखकर प्रसन्न होना चाहिए तथा आदर करना चाहिए. फिर समादृत गुणी व्यक्ति उसके सुख के लिए चेष्टा करते है.

-अज्ञात

योग्य पुरूषों के लिए कोई भी कार्य अत्यन्त कठिन नहीं होता,  विद्वानो के लिए कोई देश, विदेश नहीं होता और प्रिय वचन बोलने वालों के लिए कोई व्यक्ति पराया नहीं होता.

-अज्ञात

 virtuoso Quotes In Hindi- गुणों से भरे हृदय में दोष नहीं समाते.

हाल सातवाहन

एक बुजुर्ग से लोगों ने पूछा कि-‘इतनी महिमा दाएँ हाथ की है, तो अंगूठी बाएं हाथ में क्यों पहनते है ?’ उसने कहा-‘क्या तूने सुना नहीं कि गुणी जन सदा वंचित रहते हैं.

-शेख सादी

कुलीन व्यक्ति में प्रसन्न मुख, दान, मधुर बोल तथा दूसरों की निन्दा न करना ये चारों गुण स्वाभाविक होते हैं

-तिरूवल्लूवर

उद्यान की सुगन्ध कलियों से हुआ करती है, और भद्र पुरूष की प्रतिष्ठान न्याय और नेकी के कारण होती है.

-अबुल-फतहिल-बुस्ती

जो व्यक्ति जितनी अधिक भाषाओं का ज्ञाता है, जितने अधिक उसके मित्र है तथा जितनी अधिक कलाओं व शिल्पों में निष्णात है, वह उतने ही गुना मनुष्य है.

-एमर्सन

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